Saturday, May 17, 2014

आजकल की पीडी और हमारा व्यवहार

सुविचार

हम लोग बच्चों की बातो को अनसुना कर देते हैं

या फिर उनका मुकाबला अपने बचपन से करके उन्हें डांट देते हैं

आजकल की परिस्थियाँ बहुत भिन्न हैं

अगर हम अपने बच्चों को कुंठा से बचाना चना चाहते हैं

और उन्हें अछे संस्कार देना चाहते हैं तो उनकी बात को समझने के लिए

उन्ह धयान से सुनना होगा ,और संयमित व्यवहार से दोस्ती करनी होगी

ताकि वो बिना डर खुल कर बात कर सकें

और हम उनकी परेशानी  दूर

यही रास्ता है आजकल की पीडी को अपना बनाने का

और उन्हें अच्छे और गलत का अंतर समझाने का  
      

Sunday, March 9, 2014

आंसू

 
कोशिश करो की कभी किसी की आँखों में आप की वजह से आंसू ना आयें
 
आंसू तभी आते हैं जब दिल में दर्द होता है
 
कभी किसी के दर्द की वजह ना बनो
 
आप से छोटे भी आप से ये सब अपने आप सीख जायेंगे
 
और जब वो बड़े होंगे तो कभी आप की आँखों में आंसू नहीं आने देंगे

Saturday, March 8, 2014

झूठ संभल कर

 
कोशिश करिए की झूठ ना बोला जाए
 
क्योकि सूरज कभी बादलों के पीछे सदा के लिए नहीं छिप सकता
 
उसी तरह हर झूठ ने एक ना एक दिन सामने जरुर आ जाना है
 
इसलिए अगर झूठ बोलना भी पड़ जाए तो उतना ही बोलिए की झूठ सामने आने पर आप को शर्मिंदा ना होना पड़े
 
आपके द्वारा बोले गए झूठ का असर आप से छोटों पर सब से अधिक पड़ता है

Friday, March 7, 2014

पहले तोलो फिर बोलो

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प्यार से बोलो
 
जो काम तीर या तलवार नहीं कर सकते
 
वो मीठे बोल कर जाते हैं
 
जो जख्म तीर या तलवार नहीं दे सकते
 
वो तीखे बोल दे जाते हैं
 
इसलिए बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं
 
पहले तोलो फिर बोलो

Saturday, November 23, 2013

बीता वक्त




  वक्त बीतते पता नहीं चलता 

           और

  माँ बाप की तस्वीर दीवार पर टंग जाती है

          उस वक्त

  अपनी गलतियों का अहसास होता है

         वक्त रहते

   संभल जाओ और उनकी कद्र कर लो

          क्योंकि

  बीता वक्त हाथ नहीं आता

Thursday, October 31, 2013

जवाब

विचार

जवाब देना बहुत आसान है

चुप रहना उतना ही कठिन

अगर हम कुछ देर चुप रह जाएँ

तो कितनी ही लड़ाइयों को टाल सकते हैं

लेकिन बेवजह चुप रहना

कई बार बहुत घातक हो जाता है खुद के लिए

इसलिए जवाब दे तो सोच समझ कर

परिस्थिति के अनुसार

बड़ों को हरगिज़ नहीं

 

Monday, September 30, 2013

नम्रता




    आपका झुका सर

    अभीमानी का भी सर झुका सकता है

    आपके दो जुड़े हाथ

   कितने रिश्तो की गांठे खोल सकते हैं

  आपका बंद मुँह

  कितनी ज़ुबाने बंद करा सकता है

  ज़रा सोच कर देखिये तो